September 18, 2026

कूड़े के ढेर से ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ तक, धामी विजन ने बदल दी मियांवाला के जौहड़ की तस्वीर

*कूड़े के ढेर से ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ तक, धामी विजन ने बदल दी मियांवाला के जौहड़ की तस्वीर*

*धामी के ‘ग्रीन दून’ विजन को जमीन पर उतार रहे बंशीधर तिवारी, पुराने तालाब को एमडीडीए ने दिया नया जीवन, ‘जल सृष्टि पार्क’ 8.64 करोड़ में बना शहर का खूबसूरत पब्लिक स्पेस*

देहरादून के मियांवाला में कभी जिस जगह पर गंदगी, कूड़े के ढेर और जंगली झाड़ियों का कब्जा था, आज वही जगह लोगों के लिए सुकून, सेहत और मनोरंजन का नया ठिकाना बन गई है। जिस पुराने जौहड़ की भूमि लंबे समय से उपेक्षित पड़ी थी, वहां अब करीब 8 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ लोगों को आकर्षित कर रहा है। खास बात यह है कि विकास की दौड़ में पुराने जलस्रोत को मिटाने के बजाय उसके मूल स्वरूप को बचाते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मियांवाला में इस महत्वाकांक्षी पार्क का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसे स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का काम नहीं, बल्कि अपनी विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी भी है। यह परियोजना मुख्यमंत्री के उस विजन को जमीन पर उतारती दिखाई देती है, जिसमें विकास का मतलब केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करना नहीं, बल्कि शहर में ऐसे सार्वजनिक स्थल तैयार करना है जहां हरियाली, जल, स्वास्थ्य, मनोरंजन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ दिखाई दें।

*जहां पहले गंदगी थी, वहां अब हरियाली और जल का संगम*

राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के समीप स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार थी। स्थानीय स्तर पर यहां कूड़ा फेंका जाता था। तालाब के आसपास जंगली झाड़ियां उगी थीं और जलभराव की स्थिति बनी रहती थी। खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी बनी हुई थी।मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने इस स्थिति को चुनौती के रूप में लिया और भूमि के विकास की योजना तैयार की। प्राधिकरण ने करीब 8 करोड़ 63 लाख 83 हजार 518 रुपये की लागत वाली परियोजना को धरातल पर उतारा। निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ और करीब 02 वर्षों में मार्च 2026 में पार्क पूरी तरह तैयार हो गया। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की निगरानी में विकसित यह परियोजना इस मायने में भी अलग है कि इसमें जौहड़ के मूल जल स्वरूप को सुरक्षित रखा गया। यानी पुराने जलस्रोत को खत्म कर नया पार्क खड़ा करने के बजाय जलस्रोत को ही पार्क की पहचान का केंद्र बनाया गया।

*तालाब के बीच आइलैंड, पेडल बोटिंग ने बढ़ाया आकर्षण*

जल सृष्टि पार्क में प्रवेश करते ही सबसे ज्यादा ध्यान तालाब और उसके बीच बने खूबसूरत आइलैंड पर जाता है। यहां लोगों के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी विकसित की गई है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री धामी ने इसे देहरादून में ही ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ देने वाला स्थल बताया।

*पार्क में सुबह-शाम* टहलने और दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक बनाया गया है। योग के लिए अलग योगा डेक, बैठने के लिए बेंच और गजीबो, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय तथा जलपान गृह जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

*बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क है* तो फूलों और वनस्पतियों की जानकारी देने के लिए एजुकेशनल फ्लावर गार्डन तैयार किया गया है। पार्क में पक्षी और जैव विविधता उद्यान भी विकसित किया गया है, ताकि यह स्थान केवल मनोरंजन तक सीमित न रहे बल्कि लोगों को प्रकृति और स्थानीय जैव विविधता से जोड़ने का काम भी करे।

*विकास ऐसा जो प्रकृति को बचाए, यही धामी विजन का संदेश*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकार्पण के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसलिए पुराने तालाबों और जलस्रोतों का पुनर्जीवन केवल सौंदर्यीकरण नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को बचाने का प्रयास भी है।मुख्यमंत्री के मुताबिक वास्तविक विकास वही है, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो, शहर सुंदर बने, पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिले। जल सृष्टि पार्क को इसी सोच का उदाहरण माना जा रहा है। देहरादून में डिफेंस कॉलोनी, सिंयावाला और नेहरू कॉलोनी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में पार्कों के निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्यों को भी इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी शहर के विकास में अब सिर्फ सड़क और भवन नहीं, बल्कि ग्रीन स्पेस और नागरिक सुविधाएं भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।

*बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में एमडीडीए का नया शहरी मॉडल*

मियांवाला का जल सृष्टि पार्क एमडीडीए के उस कामकाजी मॉडल की झलक भी देता है, जिसमें उपेक्षित सरकारी भूमि को जनउपयोगी बनाने के साथ उसके पर्यावरणीय महत्व को भी बरकरार रखा जा रहा है। जौहड़ की भूमि को संरक्षित करते हुए स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। छायादार वृक्षों के साथ जलधारण क्षमता बढ़ाने, मृदा कटाव रोकने और भूमि को स्थिर रखने के उपाय किए गए। इस तरह एक ऐसी भूमि, जो कभी कूड़े और अव्यवस्था की वजह से समस्या बनी हुई थी, आज हरित क्षेत्र, जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वास्थ्य और मनोरंजन का संयुक्त केंद्र बन गई है। एमडीडीए की यह पहल मुख्यमंत्री धामी के पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन और प्राधिकरण के स्तर पर उसे धरातल पर उतारने की कोशिश को सामने लाती है। खास बात यह है कि परियोजना सिर्फ पार्क बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक पुराने जलस्रोत को केंद्र में रखकर पूरे क्षेत्र का स्वरूप बदला गया।

*सरकार ने पार्क बनाया, अब समाज को संभालना होगा*

मुख्यमंत्री धामी ने पार्क के लोकार्पण के साथ स्थानीय लोगों को इसकी जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सरकार पार्क बना सकती है, उसे सुंदर बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इसे सरकारी संपत्ति समझने के बजाय अपने पार्क के रूप में देखें। बच्चों और युवाओं से उन्होंने पार्क का अधिक से अधिक उपयोग करने, खेल, दौड़ और योग जैसी गतिविधियों से जुड़ने के साथ इसकी स्वच्छता और जलाशय की देखभाल में भी भागीदारी करने का आह्वान किया।

*मियांवाला का जल सृष्टि पार्क* अब सिर्फ एक नया पार्क नहीं, बल्कि यह दिखाने वाला उदाहरण बन रहा है कि पुराने जलस्रोत को बचाकर भी आधुनिक शहर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री धामी के हरित और पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन के साथ एमडीडीए ने जिस जौहड़ को नई पहचान दी है, वह आने वाले समय में देहरादून के प्रमुख सार्वजनिक आकर्षणों में शामिल हो होगा।