*भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता श्री मधुर भंडारकर जी आये परमार्थ निकेतन*
*पूज्य स्वामीजी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा आरती में किया सहभाग*
*वेदमंत्रों के साथ किया गंगा स्नान, पूजन और अभिषेक*
*रूद्राक्ष का दिव्य पौधा, रूद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र किया भेंट*
*परमार्थ निकेतन से बैसाखी की शुभकामनाएँ*
ऋषिकेश, 14 अप्रैल। परमार्थ निकेतन में आज प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक एवं निर्माता मधुर भंडारकर जी का आगमन हुआ। परमार्थ गंगा तट पर आयोजित विश्वविख्यात गंगा जी की आरती में पूज्य स्वामीजी के सान्निध्य में सहभाग किया। परमार्थ निकेतन में मधुर भंडारकर जी को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा, रूद्राक्ष की पवित्र माला एवं अंगवस्त्र भेंट स्वरूप प्रदान किया।
पूज्य स्वामी जी ने बैसाखी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व नई ऊर्जा, नई फसल और नए संकल्पों का प्रतीक है। बैसाखी हमें परिश्रम, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है। किसान अपनी मेहनत से सुनहरी फसल उगाते हैं, वैसे ही हम भी अपने जीवन में अच्छे विचारों, संस्कारों और सेवा के बीज बोये। यह पर्व हमें एकता, आनंद और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति दिव्य परंपराओं का संग्रह है, जीवन जीने की एक पवित्र कला है। इसमें करुणा, सेवा, प्रेम, सहिष्णुता और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसे उच्च मूल्य समाहित हैं। यदि इन मूल्यों को फिल्मों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए, तो यह युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि वे समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण का एक सशक्त साधन बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी पर फिल्मों का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह आवश्यक है कि सिनेमा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया जाए।

पूज्य स्वामीजी ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी भारतीय सिनेमा अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करेगा।
श्री मधुर भंडारकर जी ने इस अवसर पर कहा कि परमार्थ निकेतन में आकर उन्हें अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि गंगा आरती का यह दिव्य दृश्य उनके जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में से एक है। उन्होंने पूज्य स्वामीजी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिव्य गंगा आरती ने अनेक साधकों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा आने वाले समय में संस्कृति और मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूज्य स्वामी जी ने श्री मधुर भंडारकर जी को रूद्राक्ष का पौधा देकर गंगा जी के पावन तट पर उनका अभिनन्दन किया।

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