प्रसिद्ध अभिनेता सुनील शेट्टी जी एवं श्रीमती माना शेट्टी जी ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ बिताए अलौकिक आध्यात्मिक पल
फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश पर हुआ विशेष संवाद
परमार्थ निकेतन के दिव्य वातावरण को देखकर माना शेट्टी जी हुईं भावविभोर
पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में श्री सुनील शेट्टी जी एवं श्रीमती माना शेट्टी जी ने राष्ट्र, समाज, विश्व शांति और समस्त मानवता के कल्याण हेतु प्रार्थना की
परमार्थ निकेतन में एक सप्ताह के प्रवास पर आयी रेस्क्यू फाउंडेशन, मुम्बई और दिल्ली की बच्चियों से सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री सुनील शेट्टी जी ने आत्मीय भेंट की
ऋषिकेश, 26 अप्रैल। हिमालय की गोद, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में प्रेरणादायक, गरिमामय एवं भावपूर्ण अवसर था, जब भारतीय फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री सुनील शेट्टी जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती माना शेट्टी जी अपने मित्रों के साथ परमार्थ निकेतन आये। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में उन्होंने दिव्य अलौकिक एवं हृदय को स्पर्श करने वाले क्षणों का अनुभव किया। माँ गंगा के तट पर दीपों का प्रकाश, वेदमंत्रों की अनुगूँज, शंखनाद की पवित्र ध्वनि और वातावरण में व्याप्त शांति ने उनके अंतर्मन को गहराई से स्पर्श किया।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ आत्मीय संवाद के दौरान भारतीय सिनेमा की सकारात्मक भूमिका, सनातन संस्कृति के वैश्विक संदेश, प्रकृति संरक्षण तथा आज के युवाओं को सही दिशा देने जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। स्वामी जी ने कहा कि आज फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहीं, वे समाज निर्माण की सशक्त धारा बन सकती हैं। यदि चलचित्रों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था, नारी सम्मान, करुणा, सेवा, योग, आयुर्वेद, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रप्रेम के मूल्य प्रस्तुत किए जाएँ, तो वह करोड़ों लोगों तक प्रकाश पहुँचाने वाला यज्ञ बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सनातन, जीवन जीने की सर्वाेच्च कला है। सनातन हमें संदेेश देता है कि सफल बनो, पर संवेदनशील रहो; ऊँचे उठो, पर जड़ों से जुड़े रहो; आगे बढ़ो, पर दूसरों को साथ लेकर चलो। यही वह दर्शन है, जिसकी आज विश्व को आवश्यकता है।
श्री सुनील शेट्टी जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन का वातावरण एक अनुभूति है। यहाँ आकर मन स्वतः शांत हो जाता है और जीवन की प्राथमिकताएँ स्पष्ट होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना, पारिवारिक मूल्य और संस्कृति में निहित है। यदि युवा पीढ़ी इन मूल्यों को समझ ले, तो भारत विश्व के लिए केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व भी बन सकता है।
श्रीमती माना शेट्टी जी परमार्थ निकेतन के दिव्य, अनुशासित एवं सात्त्विक वातावरण को देखकर भावविभोर हो उठीं। उन्होंने कहा कि आज के तेज़ जीवन में ऐसे स्थान आत्मा को विश्राम देते हैं। यहाँ की शांति, गंगा की धारा, साधना की ऊर्जा और सेवा की भावना मन को भीतर तक स्पर्श करती है। उन्होंने अनुभव साझा किया कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक पुनर्जागरण जैसा अनुभव है।
पूज्य स्वामी जी ने युवाओं के लिए विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा ऊर्जा से पूर्ण है, पर उसे दिशा की आवश्यकता है। आधुनिकता को अपनाइए, तकनीक को अपनाइए, वैश्विक अवसरों का स्वागत कीजिए, पर अपने संस्कारों, संस्कृति और आत्मचेतना को मत खोइए। मोबाइल हाथ में हो सकता है, पर मन में मंत्र भी होना चाहिए। करियर ऊँचा हो सकता है, पर चरित्र उससे भी ऊँचा होना चाहिए। जब युवा अपनी प्रतिभा को सेवा, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ देगा, तब भारत का स्वर्णिम भविष्य सुनिश्चित होगा।
परमार्थ निकेतन में एक सप्ताह के प्रवास पर आयी रेस्क्यू फाउंडेशन, मुम्बई और दिल्ली की बच्चियों से सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री सुनील शेट्टी जी ने आत्मीय भेंट की। उन्होंने बच्चियों से चर्चा करते हुए उन्हें आशा, आत्मविश्वास और खुशहाल जीवन का प्रेरणादायी संदेश दिया। श्री शेट्टी जी ने कहा कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि मन में विश्वास, साहस और सकारात्मकता हो तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उनका स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन और उत्साहवर्धक शब्द बच्चियों के चेहरों पर मुस्कान और हृदय में नई ऊर्जा भर गए।
पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में श्री सुनील शेट्टी जी एवं श्रीमती माना शेट्टी जी ने राष्ट्र, समाज, विश्व शांति और समस्त मानवता के कल्याण हेतु प्रार्थना की।

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