’परमार्थ निकेतन में 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ प्रारम्भ’’
’‘योग के पहले धरा योग’ – गंगा एवं घाटों की स्वच्छता कर दिया ‘स्वच्छ धरा, स्वस्थ शरीर’ का संदेश’’
’’ऋषिकेश, उत्तराखण्ड।’’ 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में व्यापक स्तर पर तैयारियाँ प्रारम्भ हो चुकी हैं। इस वर्ष की तैयारियों का शुभारम्भ केवल योगाभ्यास से नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए ’’‘योग के पहले धरा योग’’’ के प्रेरणादायी संदेश के साथ किया गया। परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों तथा देश-विदेश से आए साधकों ने माँ गंगा के तट एवं घाटों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर यह संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज का आधार स्वच्छ प्रकृति एवं स्वच्छ पर्यावरण ही है।
परमार्थ पीठाधीश्वर, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के ’’पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी’’ ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन को संतुलित, समरस और जागरूक बनाने की दिव्य साधना है। उन्होंने कहा कि यदि हमारी धरती, हमारी नदियाँ और हमारा पर्यावरण प्रदूषित होंगे, तो मानव जीवन भी स्वस्थ नहीं रह सकता। इसलिए योग का वास्तविक आरम्भ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण से होना चाहिए। इसी भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ’’‘योग के पहले धरा योग’’’ अभियान का शुभारम्भ किया गया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व योग को अपना रहा है, परन्तु योग का मूल दर्शन हमें यह संदेश देता है कि हम केवल अपने शरीर से ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि से जुड़े हुए हैं। जब हम धरती को स्वच्छ रखते हैं, जलस्रोतों का संरक्षण करते हैं और प्रकृति का सम्मान करते हैं, तभी योग की वास्तविक साधना पूर्ण होती है। योग हमें ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराता है और यही भावना विश्व कल्याण का आधार है।
स्वच्छता अभियान के दौरान सभी प्रतिभागियों ने गंगा तटों एवं घाटों पर फैले प्लास्टिक, कूड़े-कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को एकत्रित कर उनके उचित निस्तारण की व्यवस्था की। साथ ही उपस्थित सभी लोगों ने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का उपयोग न करने, जल संरक्षण करने तथा अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ’’साध्वी भगवती सरस्वती जी’’ ने कहा कि योग केवल मैट पर बिताया गया एक घंटा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि हमारा व्यवहार प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नहीं है, तो हमारा योग अधूरा है। उन्होंने कहा कि धरती हमारी माता है और उसकी सेवा करना ही सच्ची साधना है। गंगा की स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मानवीय जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य केवल योगासन करना नहीं, बल्कि योग के मूल जीवन मूल्योंकृकरुणा, संतुलन, अनुशासन, सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मानकृको जीवन में उतारना है। जब हम अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखते हैं, तभी हम अपने भीतर भी सकारात्मकता, शुद्धता और ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित इस अभियान में देश-विदेश से आए अनेक साधकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ’’‘स्वच्छ गंगा, स्वस्थ भारत’, ‘योग के पहले धरा योग’, ‘धरती रहेगी स्वच्छ तभी जीवन होगा स्वस्थ’, ‘क्लीन गंगा, ग्रीन अर्थ’’’ तथा ’’‘हेल्दी प्लैनेट, हेल्दी पीपल’’’ जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।
’’12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आयोजित ’’कॉमन योग प्रोटोकॉल में विश्व के अनेक देशों से आए राजदूत, प्रतिनिधि एवं राजनयिक सहभागिता करेंगे।
पूज्य ’’स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी’’ एवं ’’साध्वी भगवती सरस्वती जी’’ के पावन सान्निध्य में भारत के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों साधक, पर्यटक, योग-जिज्ञासु, योगाचार्य तथा परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार परमार्थ गंगा तट पर कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक अभ्यास करेंगे। तत्पश्चात विश्व शान्ति यज्ञ में अपनी आहुतियाँ समर्पित करेंगे।
’’‘योग के पहले धरा योग’’’ का यह संदेश केवल अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन का संकल्प बनेकृयही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। जब धरती स्वस्थ होगी, तभी मानव स्वस्थ होगा और तभी योग का वास्तविक स्वरूप विश्व में स्थापित हो सकेगा।


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