डिजिटल युग में डिजिटल लेखन की प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
ऋषिकेश,। भारतीय लेखक समाज (INSA), नई दिल्ली के तत्वावधान में आज श्री गीता आश्रम, ऋषिकेश (उत्तराखण्ड) में “डिजिटल युग में डिजिटल लेखन की प्रासंगिकता” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
सुबह 7 बजे सभी प्रतिभागियों ने 12वा अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस में योग कर के विश्व को स्वास्थ्य के प्रति संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गीता आश्रम के संरक्षक एवं महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. के. श्रीनिवासराव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि एवं श्री गीता आश्रम के अध्यक्ष प्रो. दीपक गुप्ता उपस्थित रहे।विशेष रूप से श्री भानु मित्र शर्मा जी, संपादक गीता संदेश का अतितिब्य सराहनीय रहा
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुशील उपाध्याय, प्राचार्य, चमन लाल डिग्री कॉलेज ने की। अतिथियों का स्वागत भारतीय लेखक समाज के महासचिव डॉ. सुरेश चंद्र द्वारा किया गया, जबकि अध्यक्षीय उद्बोधन संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन पराशर ने दिया।
संगोष्ठी में विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें प्रो. अवनीश कुमार, विभागाध्यक्ष, गणित विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी; प्रो. देवेंद्र धूसिया, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययन विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली तथा श्री अरुण सिन्हा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वानों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की। इनमें डॉ. मोनिका यादव (चिकित्सा अधिकारी, आयुष विभाग), आयुष मिश्रा, रविकांत, आदित्य, राहुल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. लवली (दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया।
प्रमुख आकर्षण
1. महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में लेखन, कोडिंग, गीता एवं रामायण के माध्यम से जीवन की वास्तविकताओं को सरलता से प्रस्तुत किया।
2. प्रो. दीपक गुप्ता ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता लेखन की पद्धति एवं अभिव्यक्ति की उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करती है।
3. डॉ. सुरेश चंद्र ने भारतीय लेखक समाज द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
4. संस्था के अध्यक्ष राजन पराशर ने मौलिक लेखन के महत्व पर विशेष बल दिया।
5. प्रो. देवेंद्र धूसिया ने कॉपीराइट एवं साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
6. प्रो. अवनीश कुमार ने संगोष्ठी के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
7. डॉ. लवली ने महिला सहभागिता को रेखांकित करते हुए अपने विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि महिलाएँ भी उत्कृष्ट लेखन क्षमता रखती हैं और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

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