राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पर्यावरण विभाग के राष्ट्रीय संयोजक श्री गोपाल आर्य जी का परमार्थ निकेतन आगमन*
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से दिव्य भेंटवार्ता एवं पर्यावरण संरक्षण पर गहन संवाद*
*पर्वों एवं परम्पराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर चिंतन-मंथन*
*“धरती की भूख मिटानी है तो पेड़ लगाइए”*
— *स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
ऋषिकेश, 5 अगस्त। प्रकृति, पर्यावरण और मानवता के कल्याण के पावन संकल्प को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पर्यावरण विभाग के राष्ट्रीय संयोजक श्री गोपाल आर्य जी का परमार्थ निकेतन में आगमन हुआ। इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ उनकी दिव्य भेंटवार्ता हुई। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, हरियाली संवर्धन, भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य के निर्माण पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्राण है। भारत ने सदैव पृथ्वी को माता माना है और नदियों, पर्वतों, वृक्षों तथा समस्त जीव-जगत में दिव्यता का दर्शन किया है। पर्यावरण संरक्षण, हमारी सनातन संस्कृति का मूल संस्कार है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि धरती की भूख मिटानी है तो पेड़ लगाइए। जब धरती हरी-भरी होगी, तभी मानवता खुशहाल होगी। उन्होंने कहा कि श्रावण मास सृष्टि की सामूहिक साधना का अवसर है। यह वह पावन समय है जब सम्पूर्ण प्रकृति शिवमय हो उठती है। वर्षा की हर बूंद शिव का आशीर्वाद बनकर धरती को जीवन देती है, नदियों की हर धारा शिव की करुणा का संदेश देती है और वृक्षों की हरियाली सृष्टि के नवजीवन का उत्सव बन जाती है।
इस श्रावण अवसर पर आइए, हम अपने अंतर्मन में शिव की चेतना को जागृत करें, प्रकृति का सम्मान करें, जल, जंगल और जीवन की रक्षा का संकल्प लें तथा दुनिया में प्रेम, शांति और सद्भाव का प्रकाश प्रसारित करें।
श्री गोपाल आर्य जी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय जीवन पद्धति में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परंपराओं में जल, जंगल और जमीन के प्रति सम्मान का भाव सदैव रहा है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना होगा। जब प्रत्येक परिवार, प्रत्येक युवा और समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेगा, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता और टिकाऊ व सतत जीवनशैली को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
श्री गोपाल आर्य जी और पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि भारत की आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक पर्यावरणीय प्रयासों का समन्वय ही विश्व को एक नई दिशा दे सकता है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री गोपाल आर्य जी को श्रावण मास के पावन उपहार स्वरूप परमार्थ निकेतन का सिग्नेचर उपहार, पवित्र रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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