October 2, 2026

गंगोत्री धाम से स्वच्छता, सेवा और तीर्थों की दिव्यता बनाये रखने का संदेश

गंगोत्री धाम से स्वच्छता, सेवा और तीर्थों की दिव्यता बनाये रखने का संदेश*

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने गंगोत्री धाम के किये दर्शन*

*राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 157 वीं जयंती पर पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य व नेतृत्व में गंगोत्री धाम में किया स्वच्छता अभियान*

एक पेड़ माँ के नाम – एक पेड धरती मां के नाम का रोपण*

सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री गंगोत्री, उत्तराखंड़ और प्लास्टिक फ्री तीर्थों का आह्वान*

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं राष्ट्रनायक, पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर भावभीनी श्रद्धाजंलि*

साहस, कर्तव्य और आस्था के प्रतीक कैप्टन स्मित मच्छार जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना*

गंगोत्री, 2 अक्टूबर। हिमालय की गोद, मां गंगा की पावन धारा के आगमन की धरती पर आज सेवा का अद्भुत संकल्प लिया गया जो तीर्थ-यात्रियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवन-दृष्टि है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने गंगोत्री धाम के दर्शन कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य एवं नेतृत्व में स्वच्छता अभियान के माध्यम से प्रकृति, तीर्थ और राष्ट्र प्रेम का संदेश दिया।

गंगोत्री, एक दिव्य तीर्थ है, यह भारत की आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत केन्द्र है। यहां से प्रवाहित होती मां गंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा, आस्था और जीवन की अविरल धारा हैं। इसलिए गंगा के तट की स्वच्छता केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी आस्था के प्रति उत्तरदायित्व भी है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हम अपने आसपास, अपनी नदियों, अपने तीर्थों और अपनी धरती के प्रति सजग रहे। बापू ने स्वच्छता को जीवन का अभिन्न संस्कार माना। आज उसी विचार को हिमालय और मां गंगा की जन्मभूमि पर सेवा के रूप में प्रवाहित करना ही उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि है।

पूज्य स्वामी जी ने गंगोत्री से एक स्पष्ट और प्रखर आह्वान किया कि सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति केवल किसी अभियान का लक्ष्य नहीं, बल्कि तीर्थों की पवित्रता की रक्षा का संकल्प बने। गंगोत्री से उठने वाली यह आवाज पूरे उत्तराखंड और देश के सभी तीर्थों के लिये संदेश है कि प्लास्टिक फ्री गंगोत्री, प्लास्टिक फ्री उत्तराखंड और प्लास्टिक फ्री तीर्थ।

उन्होंने कहा कि हम तीर्थों में दर्शन करने जाते हैं, लेकिन अब समय है कि हम तीर्थों की सेवा का भी संकल्प लें। मां गंगा के दर्शन के साथ यदि हम उनके तट पर प्लास्टिक छोड़कर लौटते हैं तो हमारी श्रद्धा अधूरी है। सच्ची श्रद्धा वही है जो दर्शन को दायित्व में, आस्था को आचरण में और पूजा को प्रकृति-संरक्षण में बदल दे।

इस पावन अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं राष्ट्रनायक, पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सत्य, अहिंसा, सादगी, साहस, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के इन महान आदर्शों को स्मरण किया।

परमार्थ निकेतन ने संकट की घड़ी में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए भी प्रार्थना की और आज की परमार्थ गंगा आरती उन्हें समर्पित की। कैप्टन स्मित ने गंभीर संकट के बीच यात्रियों की सुरक्षा के लिए साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से बातचीत में उन्होंने कठिन क्षणों में हनुमान चालीसा का पाठ करने और उससे साहस प्राप्त होने की बात साझा की।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जहां एक ओर हिमालय हमें धैर्य सिखाता है, गंगा हमें प्रवाह सिखाती हैं और हनुमान जी हमें साहस का संदेश देते हैं, वहीं भारत की महान परंपरा हमें सेवा को जीवन का धर्म बनाना सिखाती है।

गंगोत्री की इस पावन धरती से आज एक संदेश कि तीर्थ केवल जाने की जगह नहीं, निभाने की जिम्मेदारी हैं।

आइए, मां गंगा के तट से यह संकल्प लेकर लौटें कि हम जहां भी होंगे, वहां स्वच्छता होगी; जहां प्रकृति होगी, वहां संरक्षण होगा; जहां समाज होगा, वहां सेवा होगी और जहां भारत होगा, वहां राष्ट्र प्रथम का भाव होगा।

मां गंगा की निर्मलता, हिमालय की दिव्यता और भारत की आध्यात्मिक चेतना सदैव अविरल रहे, यही प्रार्थना, यही संकल्प और इसी सेवाभाव के साथ इस अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम – एक पेड़ धरती माँ के नाम” का भावपूर्ण संकल्प भी लिया गया।

परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों, आचार्यों और परमार्थ परिवार के सदस्यों ने गंगोत्री धाम में स्वच्छता अभियान चलाया।