- नहीं भेजे 139 छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन अंक, प्रधानाचार्य समेत 17 शिक्षक सस्पेंड
हरिद्वार। दरअसल हरिद्वार के बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 1 में दसवीं के छात्रों के कम नंबर आए. जिसके बाद जांच की गई तो पाया कि स्कूल की ओर से आंतरिक मूल्यांकन के नंबर ही रिजल्ट में नहीं चढ़ाए गए हैं. जिसके बाद मामला प्रबंधक तक पहुंचा. प्रबंधक द्वारा कार्रवाई की गई. जिसके बाद प्रधानाचार्य समेत 17 शिक्षकों को शिक्षा प्रबंधक बोर्ड ने सस्पेंड कर दिया है और सीबीएसई बोर्ड को पत्र लिखकर बच्चों के मार्क्स बढ़ाने के लिए अनुरोध किया गया है.प्रधानाचार्य समेत 17 लापरवाह शिक्षक सस्पेंड: मैनेजमेंट बोर्ड के सचिव अनूप गोयल ने बताया कि शिक्षकों द्वारा प्रैक्टिकल के नंबर सीबीएसई बोर्ड को नहीं भेजे गए जो कि दसवीं के छात्रों के रिजल्ट में नहीं जुड़े. इससे बच्चों के नंबर काफी कम आए. अब कार्रवाई करते हुए प्रधानाचार्य समेत 17 शिक्षक सस्पेंड किए गए हैं. वहीं सीबीएसई बोर्ड को पत्र लिखकर बच्चों के भविष्य को देखते हुए नंबर बढ़ाने के लिए अनुरोध किया गया है. इसी के साथ अध्यापकों की ओर से भी इसे अपनी भूल मानते हुए गलती स्वीकार की गई है.आईएएसवहीं जानकारी के अनुसार कुछ राजनीतिक व्यक्तियों ने भी बच्चों के भविष्य को देखते हुए सीबीएसई बोर्ड और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर छूटे प्रैक्टिकल नंबर जोड़ने की मांग करते हुए पत्र लिखा है. ऐसा बताया जा रहा है कि अभी बच्चों के पेरेंट्स अपनी समस्या लेकर उनके पास गए थे।
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पिछले कई वर्षो से चर्चा में रहा भेल हरिद्वार का बाल मंदिर सी से स्कूल से1 को पूर्व मे बंद करना चाहते थे। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश पर स्कूल को बंद ना कर सके और उनके ना चाहते हुए भी स्कूल को चलाना पफा।
इससे पूर्व भी वर्ष 2022 का इंटर का रिजल्ट मे लगभग 80 प्रतिशत छात्र फेल हुए थे। तब भी भेक प्रबंधक दवारा शिक्षकों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। अभिभावकों कार्य वाही की मांग करते रहे लेकिन अभिभावकों की कोई सुनवाही नहीं हुई और कहा गया कि अपने बच्चों को किसी दूसरे स्कूल में ले जाओ हम यह स्कूल बंद कर रहे है।
ऐसा प्रतीत होता है स्कूल प्रबंधक की मिली भगत से बच्चों के रिजल्ट में हेरा फेरी की गई है जिससे कि बच्चे परेशान हो जाए और अपना प्रवेश किसी अन्य स्कूल में करा लें।
इससे पूर्व ऐसा मामला किसी भी स्कूल मे नहीं आया होगा जहां पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता हो।
यहां हम यह नही कह रहे कि बच्चों को शिक्षक द्वारा नहीं पढ़ाया गया बच्चों को पढ़ाया गया। जानकारी के अनुसार 139 छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन के मार्क्स बोर्ड को नहीं भेज। 139 बच्चों के कम मार्क्स आने के जिम्मेदार बच्चे नहीं, बल्कि शिक्षक हैं।
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