हरिद्वार। विवेचना के आलोक में अपील स्वीकार कर जिलाधिकारी, हरिद्वार का आलोच्य आदेश दिनांक 30-06-20205 निरस्त किया जाता है तथा अपीलार्थी की उचित दर की दुकान सतेन्द्र कुमार पुत्र स्व० चमनलाल, कड़च्छ, ज्वालापुर की उचित दर की दुकान हुई बहाल करने के आदेश दिये।
जिलाधिकारी, हरिद्वार द्वारा पारित आदेश पत्रांक 708/जि०पू०अ०-दु०अनु०/2025 दिनांक 30-06-2025 के विरुद्ध योजित की गई है। उक्त आदेश के द्वारा अपीलार्थी की उचित दर की दुकान का अनुबंध पत्र को निलंबित कर दिया गया और उनकी प्रतिभूति / जमानत राशि जब्त कर ली गई। जिलाधिकारी द्वारा उक्त आदेश नगर मजिस्ट्रेट, हरिद्वार, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी कनखल और पूर्ति निरीक्षक, हरिद्वार द्वारा की गई जांच आख्या दिनांक 03 02-2025 पर आधारित है, जिसमें अपीलार्थी की दुकान पर स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मात्रा से अधिक 161 बोरी चावल और 3 बोरी गेहूं पाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अपीलार्थी मौके पर इस अतिरिक्त स्टॉक के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। अपीलार्थी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि अतिरिक्त चावल सरकारी गोदाम से 20 जनवरी 2025 को तीन चक्करों में दो छोटे हाथी (ट्रको) द्वारा प्राप्त हुआ था। चूंकि खाद्यान्न एक साथ नहीं मिला, इसलिए इसे स्टॉक रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया। गेहूं के संबंध में अपीलार्थी ने तर्क दिया कि यह ग्राहकों द्वारा खरीदा गया था, जो अपने बैग साथ न लाने के कारण इसे अस्थायी रूप से दुकान पर छोड़ गए थे। जिलाधिकारी ने अपीलार्थी के तर्कों को अस्वीकार करते हुए नगर मजिस्ट्रेट, हरिद्वार क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी कनखल और पर्ति निरीक्षक की रिपोर्ट पर विश्वास किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया था कि दिनांक 20 जनवरी, 2025 को अपीलार्थी के नाम पर कोई खाद्यान्न जारी नहीं हुआ था। अपीलार्थी द्वारा उक्त तथ्यों को अस्वीकार किया गया है तथा जिलाधिकारी, हरिद्वार द्वारा पारित आलोच्य आदेश के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गई है।
पक्षों के वि० अधिवक्ताओं को सुना तथा जिलाधिकारी, की पत्रावली एवं केश सेल रजिस्टर एवं मध्यान भोजन योजना रजिस्टर का अवलोकन कियाा गया। अपीलार्थी के वि० अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि कि अपीलार्थी को जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार द्वारा नियमानुसार वर्ष 2016 से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान आवंटित की गई थी जो बिना किसी आपत्ति के और बिना किसी परेशानी के लगातार चलती रही। अपीलार्थी सत्य निष्ठा एवं ईमानदारी से शासन की नितियों का पालन करते हुये अपने सस्ते गल्ले की दुकान लगातार चला रहा है। किसी को भी कभी कोई आपत्ति नही रही। कि वास्तव में दिनांक 30-03-2025 तक गोदाम से माह जनवरी व फरवरी 2025 की मांग के अनुसार 117 कुन्टल चावल आना चाहिये था परन्तु अभी केवल 161 कट्टे अर्थात् 80.5 कुन्टल ही राशन आया था क्योकि और अधिक राशन आना था इसलिये रजिस्ट्रर में उसे अंकित नहीं किया गया क्योकि सम्पूर्ण राशन जब तक प्राप्त नहीं होता तब तक उसे रजिस्टर में अंकित नहीं करते है पूर्ण राशन प्राप्त होने उसे रजिस्टर में अंकित करते है और उसके बाद बाटा जाता है यह चावल माध्यान भोजन हेतु गोदाम से भेजा जा रहा था। अतिरिक्त चावल सरकारी गोदाम से 20 जनवरी 2025 को तीन चक्करों में दो छोटे हाथी (ट्रको) द्वारा प्राप्त हुआ था। चूंकि खाद्यान्न एक साथ नहीं मिला, इसलिए इसे स्टॉक रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया। गेहूं के संबंध में अपीलार्थी ने तर्क दिया कि यह ग्राहकों द्वारा खरीदा गया था. जो अपने बैग साथ न लाने के कारण इसे अस्थायी रूप से दुकान पर छोड़ गए थे। अपीलार्थी ने गोदाम के मध्यान भोजन योजना/कैश सेल रजिस्टर की फोटोकॉपी प्रस्तुत की है जिसमें स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
इस अलकन नहीं किया गया। सिएनएऔर कोस्टर की फोटापत्रस्तुत करने का असर मिला। यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत “audi alteram partem (दूसरे पा को सुनना और धानुका अधिकारका स्पष्ट उलन है।अधिकारियों द्वारा यह दावा किया कि एक छोटा हाथी 505 विवंटल चावल नहीं ले जा सकता। यहा असेल और क्योंकि अपने स्पष्ट किया कि चावल तीन अलग-अलग करों में गया था। अपीलार्थी ने अपने त को तथ्यों के समर्थन में ड्राइवरों किए गए है। इस प्रकार यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे असंभव मानना ही है। अपीलार्थीद्वारा जांच अधिकारियों द्वारा यह भी कहा गया कि अपीलार्थी के स्पष्टीकरण को खारिज किया कि ग्राहकों द्वारा नेहूं दुकान पर छोडमा समझ से परे है। यह एक अनुमान पर आधारित तर्क है, जिसका कोई विधि आधार नहीं है. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह सामान्य प्रथा है कि ग्राहक अस्थायी रूप से सामान छोड़ जाते हैं। उनके समर्थन में भी अपीलामी द्वारा दुकान में छोडे गये ग्राहकों के शपथ पत्र प्रस्तुत किए गए है। जिलाधिकारी अधीनस्थ अधिकारियों की एकतरफा रिपोर्ट पर विश्वास किया गया है जबकि अपीलार्थी वो दोस साक्ष्यों जैसे रजिस्टर में छेडछाड का सबूत को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। यह न्यायालय अपीलार्थी के कथनों में बाल पाती है तथा उपरोक्त विश्लेषण कानूनी प्रावधान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह जपील स्वीकार की जाती है।
उपरोक्त विवेचना के आलोक में अपील स्वीकार कर जिलाधिकारी, हरिद्वार का आलोच्य आदेश दिनांक 30-06-20205 निरस्त किया जाता है तथा अपीलार्थी की उचित दर की दुकान को बहाल किया जाता है। आदेश की प्रति सहित जिलाधिकारी की पत्रावली व अभिलेख वापस प्रेषित किए जाय। इस नावालय की पत्रावली बाद आवश्यक कार्यवाही पत्रावली संचित हो।
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