देहरादून । देहरादून के क्लेमेनटाउन में स्थित बुद्धा टेंपल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। इसको मिंड्रोलिंग मोनेस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1965 में शुरू हुआ था। यहां भगवान बुद्ध के साथ ही गुरु पद्मसंभव की विशाल प्रतिमाएं हैं। मठ के अंदर बुद्ध की 103 फीट ऊंची प्रतिमा है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।
आज शुक्रवार को बुद्ध टेंपल देहरादून क्लेमेनटाउन में क्यास्यूगुम्फा (किन्नौरी मॉनरच्सी) में वार्षिक समारोह मनाया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर मोनशेलिंग मठ के वसीलामा तथा अन्य लामा और विद्यार्थी उपस्थित थे। समारोह का मुख्य आकर्षण लामा डॉस था जो कि गुरु पदमसंभव की पुण्यतिथि की मनाया जाता है। ऐसे किवदन्ति प्रचलित है कि गुरु पदमसंभव को भारत से तिब्बत के राजा ने आमंत्रण दिया था कि तिब्बती लोगों की नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए कुछ उपाय किए जाए। गुरु पदम संभव उस काल के प्रसिद्ध योगी और तांत्रिक थे उनके उपाय द्वारा ही तिब्बत में शांति स्थापित हो पाई थी। इस अवसर पर छोगन रिस्पोंछे, गारिमोपोछे लामा सोनम, लामात्मराज, तिब्बतियन कलोनी के गणमान्य लोग, विजय कुमार, डॉक्टर घनश्याम सिंह आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर दोपहर को भोज की व्यवस्था गणमान्य भारतीयों एवं विदेशी अतिथियों के लिए एक पंडाल में तथा दूसरे पण्डाल में आम लोगों के लिए आयोज किया गया है। कार्यक्रम में नमकीन, तिब्बती चाय विशेष रूप से दी गयी।


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