March 13, 2026

पद्मश्री श्री कैलाश खेर जी का कैलासा बैंड के साथ परमार्थ निकेतन में में आगमन

पद्मश्री श्री कैलाश खेर जी का कैलासा बैंड के साथ परमार्थ निकेतन में में आगमन
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन के पावन अवसर पर आज कैलासा बैंड का मंत्रमुग्ध कर देने वाला कॉन्सर्ट
परमार्थ निकेतन में योग व संगीत का अद्भुत संगम
मां गंगा की लहरों के साथ स्वर लहरों का जादू

ऋषिकेश, 13 मार्च। आज पद्मश्री श्री कैलाश खेर जी अपने प्रसिद्ध कैलासा बैंड के साथ परमार्थ निकेतन पहुँचे, उन्होंने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी से भेंट कर पूज्य स्वामीजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
परमार्थ निकेतन में इन दिनों योग, भक्ति, संगीत और अध्यात्म का एक दिव्य उत्सव साकार हो रहा है, जिसमें विश्व के अनेक देशों से आये योग साधक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की दिव्यता का अनुभव कर रहे हैं। इसी पावन वातावरण में आज सायंकाल श्री कैलाश खेर जी की मधुर, ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज गंगा तट पर गूँजेगी और पूरा परिसर भक्ति और संगीत की दिव्य तरंगों से सराबोर हो उठेगा।
माँ गंगा की शांत, पवित्र और कल-कल करती लहरों के बीच जब कैलासा बैंड की स्वर लहरियाँ वातावरण में प्रवाहित होंगी, तब यह दृश्य मानो प्रकृति और संगीत का एक अद्भुत संगम बन जाएगा। गंगा आरती के पश्चात होने वाला यह विशेष कॉन्सर्ट देश-विदेश से आये योगियों और श्रद्धालुओं के लिये एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बनेगा, जहाँ भारतीय संगीत की मधुरता और भक्ति की गहराई एक साथ अनुभव की जा सकेगी।
श्री कैलाश खेर जी की आवाज में संगीत की मधुरता के साथ भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना की गहराई भी झलकती है। उनके गीतों में वह शक्ति है जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है और श्रोताओं को भीतर तक भाव-विभोर कर देती है।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने पद्मश्री कैलाश खेर जी और कैलासा बैंड का अभिनन्दन करते हुए कहा कि संगीत वह दिव्य माध्यम है जो हृदय को स्पर्श कर हमें ईश्वर के और निकट ले जाता है। उन्होंने कहा कि कैलाश खेर जी अपने संगीत के माध्यम से वर्षों से भक्ति, प्रेम, सकारात्मकता और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का संदेश विश्वभर में पहुँचा रहे हैं।

आज की यह संध्या केवल एक कॉन्सर्ट नहीं, बल्कि माँ गंगा के पावन सान्निध्य में संगीत, भक्ति और योग की दिव्य अनुभूति का उत्सव है, एक ऐसा क्षण जहाँ स्वर, साधना और श्रद्धा का दिव्य संगम होगा, आइए इस क्षण के साक्षी बनें।