प्रैस क्लब ने की आचार्य किशोरीदास वाजपेयी को मरणोपरांत पदम्श्री देने की मांग
हरिद्वार, 23 जनवरी। प्रैस क्लब ने हिंदी के पाणिनी आचार्य किशोरी दास वाजपेयी की जयंती पर उन्हें मरणोपरान्त पदम्श्री सम्मान देने की मांग की है। आचार्य किशोरी दास वाजपेयी को पदम्श्री दिए जाने की मांग को लेकर जल्द ही प्रैस क्लब की और से सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा।

प्रैस क्लब हरिद्वार की और से आचार्य किशोरी दास वाजपेयी की जयंती धूमधाम से मनायी गयी। इस अवसर पर कनखल चौक बाजार तथा प्रैस क्लब में स्थापित आचार्य किशोरी दास वाजपेई की मूर्ति पर प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी, महामंत्री दीपक मिश्रा तथा सभी सदस्यों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात प्रैस क्लब सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने की तथा संचालन प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य प्रदीप गर्ग ने किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि शब्द अनुशासन से वाजपेई जी ने हिंदी व्याकरण को पूर्णता प्रदान की। हिंदी पत्रकारों के लिए वह एक प्रकाश स्तंभ की तरह है, हमें उनके दिखाये कदमों पर चलना चाहिए। महामंत्री दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रेस क्लब हरिद्वार ही देश में एकमात्र संस्था है। जहां आचार्य किशोरीदास बाजपेयी की जयंती और निर्वाण दिवस मनाया जाता है। प्रेस क्लब के अथक प्रयासों से ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आचार्य की आचार्य किशोरदास बाजपेयी शोधपीठ की स्थापना हुई है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील दत्त पांडे ने आचार्य किशोरी दास वाजपेई के साथ बिताए हुए अमूल्य पलों का स्मरण कर उन्हें साथी सदस्यों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान की मूर्ति और मां सरस्वती के साधक आचार्य किशोरी दास वाजपेई एक सह्रदय शख्सियत थे। उन्होंने गोष्ठी में सरकार से आचार्य वाजपेई को मरणोपरांत पद्मश्री देने की मांग की। रजनीकांत शुक्ला ने आचार्य वाजपेई के कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे स्वाधीनता सेनानी थे तथा जब उनका अध्ययन पूरा हुआ तो अंग्रेजी राज में उन्होंने जनरल डायर के हाथों से डिग्री लेना स्वीकार नहीं किया। यह उनका स्वाभिमान ही था कि 1977 में हिंदी के शीर्ष सम्मेलन में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उनके पास जाकर उनको सम्मान भेंट किया था। संजय आर्य व बृजेन्द्र हर्ष ने उनके शब्द अनुशासन ग्रंथ पर चर्चा करते हुए इसे हिंदी पत्रकारों के लिए मील का पत्थर बताया। बालकृष्ण शास्त्री, दुष्यंत कुमार, संदीप शर्मा, महेश पारीक, नरेश दीवान शैली, दीपक नौटियाल, प्रदीप गर्ग, काशीराम सैनी, अमित गुप्ता, ललितेंद्र नाथ आदि ने भी विचार रखें। गोष्ठी में तय किया गया कि प्रेस क्लब की और सरकार को प्रस्ताव भेजकर आचार्य किशोरीदास वाजपेयी को मरणोपरांत पद्मश्री प्रदान करने मांग की जाएगी।

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