उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास आवश्यकताओं के प्रति केंद्र सरकार प्रतिबद्ध
देहरादून। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण तथा वित्तीय सहायता से जुड़े विभिन्न विषयों पर केंद्र सरकार द्वारा की गई कार्रवाई और उपलब्ध कराई जा रही सहायता की जानकारी दी।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा है कि आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। हालांकि, आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार राज्यों को हर संभव सहयोग प्रदान करती है। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। गंभीर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल के आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड को राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के अंतर्गत 1012 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें 911.20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार तथा 100.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार का अंश है। केंद्र सरकार द्वारा अपने हिस्से की पूरी राशि दो समान किस्तों में राज्य को जारी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के अनुसार 1 अप्रैल 2025 को SDRF खाते में 2503.07 करोड़ रुपये की प्रारंभिक शेष राशि भी उपलब्ध थी।
उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2025 में उत्तराखंड में हुई बादल फटने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ज्ञापन की प्रतीक्षा किए बिना 8 अगस्त 2025 को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन किया था। इस दल ने 7 से 9 सितंबर 2025 तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर क्षति का आकलन किया। राज्य सरकार द्वारा बाद में संशोधित ज्ञापन प्रस्तुत किए जाने के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय सहायता के संबंध में अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि गंभीर आपदाओं के बाद पुनर्स्थापन एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) कराया जाता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2025 की विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनज़र PDNA कराया गया, जिसके आधार पर 10,998.95 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया गया था। निर्धारित मानकों के अनुरूप केंद्र सरकार ने 811.87 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 608.90 करोड़ रुपये है, जिसकी प्रथम किस्त के रूप में 182.67 करोड़ रुपये 26 मई 2026 को राज्य सरकार को जारी किए जा चुके हैं।
पत्र में उत्तराखंड में भूस्खलन पूर्वानुमान प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही कहा गया है कि यदि राज्य सरकार आवश्यक समझे तो अधिकारियों के दल को राष्ट्रीय भूस्खलन पूर्वानुमान केंद्र, कोलकाता भेजकर तकनीकी अध्ययन भी कराया जा सकता है।
वन भूमि पर पुनर्वास के संबंध में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वन भूमि का उपयोग केवल निर्धारित परिस्थितियों एवं शर्तों के अंतर्गत ही किया जा सकता है।
श्री नित्यानंद राय ने अपने पत्र में विश्वास व्यक्त किया है कि भारत सरकार, उत्तराखंड सरकार के साथ समन्वय बनाकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों के राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में निरंतर हरसंभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।
इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से एक संवेदनशील राज्य है। राज्य को प्राकृतिक आपदा से प्रत्येक वर्ष बड़ी हानि होती है जिससे राज्य के विकास कार्य प्रभावित होते हैं तथा अवसंरचनात्मक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा राज्य को आपदा प्रबंधन से संबंधित दी जा रही सहायता के लिए प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

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