श्रावण सोमवार पर परमार्थ निकेतन में सेवा, साधना और करुणा का संगम

*✨श्रावण सोमवार पर परमार्थ निकेतन में सेवा, साधना और करुणा का संगम*

*💥कांवड़ यात्रियों की सेवा में मेडिकल कैंप और जल मंदिर बने आस्था के साथ मानवता के केंद्र*

*🌺श्रावण सोमवार, भीतर के शिवत्व को जागृत करने का दिव्य अवसर*

*🌼परमार्थ निकेतन में रूद्राभिषेक के साथ मानवता का अभिषेक*

*🔱शिव बाहर नहीं, भीतर हैं*

*✨स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 10 अगस्त। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में श्रावण के दूसरे सोमवार के अवसर पर रूद्राभिषेक कर विश्व शान्ति की प्रार्थ की। साथ ही कांवड़ यात्रियों की सेवा, चिकित्सा सहायता और जल मन्दिरों के माध्यम से जल सेवा निरंतर की जा रही है। प्रतिदिन लगभग दो हजार से तीन हजार कांवड़ यात्रियों को प्रतिदिन चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है साथ ही हजारों-हजारों कांवड यात्रियों को जल मन्दिरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल सेवा, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के आशीर्वाद से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

श्रावण के दूसरे सोमवार के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्रावण सोमवार, शिव से जुड़ने और स्वयं से मिलने का पावन अवसर है। मन को शांत करने, चेतना को जागृत करने और भीतर के शिवत्व को अनुभव करने का दिव्य अवसर है। श्रावण की हर बूँद हमें प्रकृति, पवित्रता और जीवन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि शिव बाहर नहीं, भीतर हैं। शिव को पाने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं; बस एक क्षण ठहरकर अपने भीतर उतरना है। श्वास को महसूस करना है, मौन को सुनना है और उस चेतना को पहचानना है जो हर पल हमारे भीतर जाग रही है।

श्रावण इसी यात्रा की ओर संकेत करता है, जहाँ ध्यान दूर की मंज़िल नहीं, बल्कि इसी क्षण में जागने का नाम है। जब मन शांत होता है, श्वास सजग होती है और भीतर का मौन गहराता है, तब अनुभव होता है, जिस शिव को हम खोज रहे थे, वही हमारे भीतर सदा से विराजमान हैं।

बाघखाला में आयोजित परमार्थ निकेतन, मेडिकल कैंप में दूर-दराज से गंगाजल लेकर अपने आराध्य भगवान शिव को अर्पित करने के लिए पैदल यात्रा कर रहे कांवड़ यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएँ, प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। लंबे सफर, थकान, पैरों में छाले, दर्द, कमजोरी और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे यात्रियों के लिए यह चिकित्सा सेवा उनके कठिन आध्यात्मिक सफर में सहायक बन रही है।

कैंप में चिकित्सकों, नर्सिंग टीम और सेवा में जुटे स्वयंसेवकों द्वारा पूरे समर्पण के साथ कावंड यात्रियों की सेवा की जा रही है। किसी के पैरों की मरहम-पट्टी हो रही है, किसी को आवश्यक दवा दी जा रही है, तो किसी को कुछ देर विश्राम कर पुनः अपनी यात्रा प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हर थके हुए यात्री को विश्राम स्थल प्रदान किया जा रहा है।