देहरादून। पल दे छेन छोखोर लिंग मठ क्लेमन टाऊन देहरादून में पदम संभव जयंती का आयोजन हर्षोल्लास तथा श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। यहां पर पदम संभव जयंती प्रतिवर्ष तिब्बती पंचांग के अनुसार तिब्बती प्रथम मास के दसवे तारीख को मनाया जाता है। आचार्य पदम संभव आठवीं सदी के महान भारतीय बौद्ध दार्शनिक तथा सिद्ध तांत्रिक थे। जिन्होंने आठवीं सदी में बौद्ध धर्म दर्शन विशेषकर बौद्ध बज्रयान परम्परा को तिब्बत में स्थापित किया। बौद्ध धर्म दर्शन में इनका विशेष योगदान होने से उन्हें द्वितीय बुध के नाम से भी अभिहित किया गया है।
पल दे छेन छोखोर लिंग मठ में इनके 8 सुप्रसिद्ध अवतरित विभूतियों के लीलाओं को प्रदर्शित करते हुए देव नृत्य मंचन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने श्रद्धा पूर्वक दर्शन का लाभ लिया। पदम संभव के आठ लीलाओं के अतिरिक्त इसमें अन्य बौद्विसत्वों तथा धर्मपालों का नृत्य भी प्रदर्शित किया गया। यह कार्यक्रम मठ प्रमुख पूज्य हो कौनयह कार्यक्रम मठ प्रमुख पूज्य शोगुण रिनपोचे जी के नेतृत्व में तथा पूज्य गाड़ी 9ः00 बजे आदि के उपस्थिति में संपादित कियायह कार्यक्रम मठ प्रमुख पूज्य छोगोन रिन्पोछे जी के नेतृत्व में तथा पूज्य गारिनपोछे आदि की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
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