
भारत के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की 100 वीं जयंती और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न महामना स्वर्गीय पंडित मदनमोहन मालवीय जी की 163 वी जयंती पर अर्पित की विशेष आहुति*
*🌸भारत के दसवें प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की 100 वीं जयंती पर परमार्थ निकेतन में हुआ विशाल भंडारा*
*✨राहगिरों, निराश्रितों, पूज्य संतों और साधुओं को कराया भंडारा और वितरित किये कंबल*
*💐आज की परमार्थ गंगा आरती भारत के दोनों रत्नों को समर्पित की*

ऋषिकेश, 25 दिसम्बर। भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की 100वीं जयंती और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी की 163वीं जयंती के अवसर पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्रद्धा और सम्मान के साथ इन दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को याद करते हुए कहा, अटल जी, अटल थे, सबल थे और निर्बलों के बल थे। वे जब भी किसी से मिलते थे, उनकी विनम्रता और वाणी में ऐसी शक्ति होती थी कि वह हर व्यक्ति के दिल में अपनी विशेष जगह बना लेते थे। उनका व्यक्तित्व सशक्त था और उनकी हर बात से समाज के हर वर्ग को एक दिशा मिलती थी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, कि आज के दिन की गंगा आरती को हम दोनों महान व्यक्तित्वों को समर्पित करते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि हम सभी को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठा और संकल्प से काम करना चाहिए। अटल जी ने हमेशा देश की सेवा की और समाज को प्रगति की दिशा दी।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में एक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें राहगीरों, निराश्रितों, पूज्य संतों और साधुओं को भोजन कराया गया। यह भंडारा अटल जी की जयंती और पंडित मदनमोहन मालवीय जी की जयंती की श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और शिवोऽहम् चैरिटेबल ट्रष्ट गोर्वधन, मथुरा के श्री हरिशंकर जी शर्मा ने अपने हाथों से सभी को भोजन परेासा।
आज के दिन को तुलसी पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाता और कुछ लोग क्रिसमस के रूप में भी मनाते है इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज का दिन पेड़ काटने का नहीं, बल्कि पेड़ लगाने का है। स्वामी जी ने मध्यप्रदेश सरकार की पहल का स्वागत करते हुए कहा, मध्यप्रदेश सरकार ने वृक्षों को भी पेंशन देने की योजना बनाई है, जो एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। वृक्ष हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं और यह हमारे जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
स्वामी जी ने कहा, आज के दिन हम केवल तुलसी का पौधे के साथ हर प्रकार के वृक्षों का रोपण करें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को ताजगी और शुद्ध वायु मिल सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण बातें साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से जीवन को देने की ओर अग्रसर रही है। हमने कभी जीवन को छीनने का प्रयास नहीं किया, हम हमेशा से जीवन देने वाले रहे हैं, चाहे वह वृक्ष हों, वृद्ध हों या फिर हम स्वयं। यह हमारी संस्कृति की पहचान है, और हमें इसे संरक्षित करना होगा।
भारतीय संस्कृति का एक अहम अंग है प्रकृति की पूजा और संरक्षण। वृक्षों, नदियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भारतीय जीवन का मूल आधार रहा है, और हमें इसे आगे बढ़ाना चाहिये।
आज की गंगा आरती में श्रद्धांजलि स्वरूप श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी और पंडित मदनमोहन मालवीय जी को याद किया गया। आज की परमार्थ गंगा आरती भारत के दोनों रत्नों श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी और पंडित मदनमोहन मालवीय जी की जयंती पर समर्पित की।

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