April 5, 2025

राष्ट्रीय चेतना के वाहक माखनलाल चतुर्वेदी जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि

*🌺राष्ट्रीय चेतना के वाहक माखनलाल चतुर्वेदी जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि*

*✨माखनलाल चतुर्वेदी जी की लेखनी आज भी राष्ट्र की आत्मा को जगाती है*

*🙏🏾स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

4 अप्रैल, ऋषिकेश। भारत के यशस्वी कवि, क्रांतिकारी पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और साहित्य-संस्कार के पुरोधा पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी की 136वीं जयंती पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की आज की दिव्य गंगा जी की आरती समर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी जी केवल एक कवि नहीं थे, वे भारत की आत्मा के सजग प्रहरी थे। जब देश अंग्रेजों की दासता में जकड़ा हुआ था, तब उनकी लेखनी ने स्वतंत्रता की पुकार की। उन्होंने न केवल कविताएं लिखीं, बल्कि अपनी कलम को एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल किया, जो जन-जन में चेतना जागृत करती रही। उनकी कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ केवल साहित्य नहीं है, वह हर युवा के भीतर राष्ट्रप्रेम का दीप जलाने वाली ज्योति है।

स्वामी जी ने कहा कि आज की पीढ़ी को माखनलाल जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। जिन्होंने समाज को केवल शब्दों से नहीं, कर्म से भी दिशा दी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साहित्यकार भी क्रांति का पथ प्रदर्शक हो सकते हैं।

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी भारत के उन अद्वितीय साहित्यकारों में से एक थे, जिन्होंने कलम को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित किया। वे प्रभा, कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठित पत्रों के संपादक रहे और ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध लेखन करते हुए अनेक बार जेल गए। वर्ष 1921-22 में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लेते हुए जेल की यातनाएं सही, लेकिन अपने विचारों और राष्ट्रभक्ति में कभी डगमगाए नहीं।

उनकी रचनायें भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। इनमें न केवल देशभक्ति की भावना है, बल्कि प्रकृति, प्रेम और मानवीय मूल्यों का गहरा चित्रण भी मिलता है। वे सरल भाषा के सशक्त शिल्पी थे, जिनके शब्द आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करते हैं।

उन्होंने अपनी लेखनी से भारत की आत्मा को आवाज दी। उनकी कविताएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी आजादी के संघर्ष के समय थीं।

पुष्प की अभिलाषा और वीरों का कैसा हो बसंत जैसी कविताओं आज भी सभी को भावविभोर कर देती है। माखनलाल चतुर्वेदी जी का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए आदर्श है। माखनलाल जी जैसे पत्रकार हमें सिखाते हैं कि कलम का असली उद्देश्य जन-जागरण और सत्य की रक्षा है।

यदि आज की युवा पीढ़ी सच्चे अर्थों में देशभक्ति को जीना चाहती हैं, तो माखनलाल जी के विचारों को पढ़ना, समझना और अपनाना होगा। वे आज भी हमारे पथ-प्रदर्शक हैं। उनका जीवन एक सतत प्रेरणा है उन्होंने साहित्य के माध्यम से सेवा और राष्ट्र की साधना की।