*विश्व हिंदी दिवस पर बीएचईएल में प्रभागीय काव्य गोष्ठी का आयोजन*
हरिद्वार। राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बीएचईएल, हरिद्वार के तत्वावधान में, विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर नए अभियांत्रिकी भवन सभागार में, एक भव्य प्रभागीय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (फाउंड्री एवं फोर्ज टेक्नोलॉजी) डॉ. अरानी नागा सुधाकर एवं विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कविगण डॉ. शिव शंकर जायसवाल एवं श्री भूदत्त शर्मा द्वारा, माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डा. सुधाकर ने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में साहित्य ही वह माध्यम है जो समाज को संवेदनाओं से जोड़े रखता है । उन्होंने कहा कि एक मंच पर इतने कवियों का जुटना, हिंदी साहित्य की समृद्धि का परिचायक है । डॉ. शिव शंकर जायसवाल ने अपनी रचना ‘’हे परम हंस के दिव्य पूत, हे नव भारत के अग्रदूत तथा श्री भू दत्त शर्मा ने ‘’पांव धरती पर धरो, धीर भी धरना सखे’’ के माध्यम से श्रोताओं को अविभूत किया ।
इस गोष्ठी में देवेंद्र मिश्रा, मंजुला भगत, शशि रंजन समदर्शी तथा महेंद्र कुमार माही सहित, प्रभाग के कुल 31 कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । प्रभारी (राजभाषा) श्री हरीश सिंह बगवार ने सभी अतिथियों एवं रचनाकारों का स्वागत करते हुए, विश्व हिंदी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री संतोष कुमार गुप्ता ने सभी कवियों को स्मृति चिह्न एवं हिंदी ई-मेल प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया । श्री गुप्ता ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारे भावों की अभिव्यक्ति है । उन्होंने कहा कि हिंदी को जीवंत और ऊर्जावान बनाए रखने का श्रेय हमारे कवियों को जाता है ।
इस अवसर पर अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री पार्थ सारथी गौड़ सहित राजभाषा विभाग के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे । गोष्ठी का संचालन कवि सोनेश्वर कुमार सोना ने अपनी चिरपरिचित शैली में किया ।

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