जय जगन्नाथ! जय संगम! जय सनातन संस्कृति!*
परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, संगम तट प्रयागराज में भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान सम्पन्*
महाप्रसाद महाभोग महाभंडारा*
आयार्चों, पुरोहित गण और बटुकों हेतु विशाल महाभोग भंडारा*
पूज्य संत स्वामी ईश्वरदास जी, भगीरथी आश्रम, हरिद्वार, स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती जी, रायबरेली आश्रम, स्वामी धर्मात्मानन्द सरस्वती, परमार्थ आश्रम हरिद्वार, गोरखपुर मठ से स्वामी शुक्रायनाथ जी, मठ श्री बाघम्बरी गद्दी, मन्दिर श्री बड़े हनुमान जी, मन्दिर, स्वामी श्री शिवा गिरी जी, स्वामी श्री रजनीश पुरी जी, स्वामी श्री महेन्द्र पुरी जी, श्री त्रिवेणी शरण जी महाराज, आदि वेणी माधव, श्री राजा रामदास जी, फलाहारी आश्रम और अनेक पूज्य संतों का पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद*
प्रसि़द्ध उद्योगपति व समाज सेवी श्री राधेश्याम गोयनका जी, प्रसि़द्ध उद्योगपति, समाज सेवी, श्री अतुल सुल्तानिया जी, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाज सेवी, श्री राधेश्याम अग्रवाल जी, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तरप्रदेश, श्री दुर्गा शंकर मिश्रा जी, रूपा ग्रुप्स, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाज सेवी, श्री कुंज बिहारी अग्रवाल जी, प्रसि़द्ध उद्योगपति एवं समाज सेवी, श्री दिनेश शाहरा जी, कमिश्नर विमल कुमार दुबे जी और अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, संगम तट प्रयागराज में भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान सम्पन्न हुआ*
संगम के तट से पूज्य स्वामी जी का पावन संदेश*
राष्ट्र से राम ओर राम से राष्ट्र*
स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
प्रयागराज। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज के दिव्य संगम तट पर भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्राणप्रतिष्ठा का भव्य, अलौकिक और वैदिक अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा, शास्त्रीय विधि-विधान तथा वेदमंत्रों के पवित्र उच्चारण के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का विराट उत्सव है।
प्रातःकाल से ही संगम क्षेत्र दिव्यता से आलोकित था। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर शंखध्वनि, घंटानाद, हवन की सुगंध और वैदिक ऋचाओं की मधुर गूँज के साथ इस देवभूमि में गूंजायमय हो रही है। आचार्यों, पुरोहितों और वेदपाठी बटुकों द्वारा सम्पन्न प्राणप्रतिष्ठा की प्रत्येक क्रिया अत्यंत सूक्ष्म, शुद्ध और शास्त्रसम्मत थी। आज प्रातःकाल सूर्य पूजन के साथ ही भगवान श्री जगन्नाथ जी की प्रतिमा में प्राणों का आवाहन होते ही वातावरण ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
इस पावन अवसर पर जगन्नाथ पुरी से आये महाराजों ने महाप्रसाद, महाभोग बनाया। इस अवसर पर विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं, संतों, आचार्यों, पुरोहितों और बटुकों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। 
यह आयोजन सनातन दर्शन की उसी अखंड परंपरा का स्मरण कराता है, जिसे आदि काल से ऋषि-मुनियों ने पोषित किया है। जिस प्रकार आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में चार धामों की स्थापना कर भारतवर्ष को आध्यात्मिक एकता के सूत्र में बाँधा, उसी दिव्य भावना को वर्तमान युग में पुनर्जीवित करते हुए पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने संगम की इस पावन भूमि पर चारों धामों की चेतना का संगम साकार किया है। यह केन्द्र राष्ट्रएकता का संवाहक बना कर आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र प्रथम और संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् का संदेश प्रसारित करना रहेगा।
परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में निर्मित यह आध्यात्मिक केंद्र एक तीर्थ के साथ समग्र भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को चारों धाम तथा उत्तराखंड के पावन धामों के दर्शन और अनुभव एक ही स्थल पर प्राप्त होंगे। श्रद्धालु संगम की इस भूमि पर ही संपूर्ण धामों का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।
संगम की पावन रेत पर सम्पन्न यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह संदेश देता है कि जब आस्था और संगठन साथ आते हैं, तब संस्कृति पुनर्जागृत होती है, राष्ट्र सशक्त होता है और मानवता आलोकित होती है।
भगवान श्री जगन्नाथ जी की यह प्राणप्रतिष्ठा सनातन चेतना के नवजागरण का शंखनाद है, जो प्रत्येक हृदय में श्रद्धा, शक्ति और शांति का संचार कर समस्त विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” का मार्ग दिखाता है।
श्री विनोद बागरोडिया जी, श्री रजत बागरोडिया जी, श्रीमती उपासना बागरोडिया जी सम्पूर्ण बागरोडिया परिवार एवं आभा बागरोडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से यह दिव्य आयोजन सम्पन्न हो रहा है।

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