परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में भव्य एवं दिव्स सात दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम का आयोजन
“गंगोत्री से गंगासागर” तक योग
12 वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम – स्वस्थ आयु के लिए योग
योग, भारत की विश्व को अमूल्य देन 🌸हर रोज योग की डोज
योग करो, रोज करो, मौज करो
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। “गंगोत्री से गंगासागर” अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस काउंटडाउन अभियान के अंतर्गत तथा 12वें वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सात दिवसीय काउंटडाउन के अवसर पर आज प्रातःकाल परमार्थ निकेतन, पवित्र गंगा तट, ऋषिकेश में एक भव्य, दिव्य एवं प्रेरणादायी कॉमन योग प्रोटोकॉल का आयोजन किया गया। यूट्यूब पर लाइव प्रसारित इस कार्यक्रम में परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, अंतर्राष्ट्रीय निदेशक, परमार्थ निकेतन, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, योग साधकों, आध्यात्मिक गुरुओं, सरकारी अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभाग कर स्वास्थ्य, सामंजस्य एवं समग्र कल्याण का संदेश दिया।
यह कार्यक्रम 21 जून को आयोजित होने वाले 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय जनआंदोलन का हिस्सा है। जिसमें सम्पूर्ण भारत “हर घर योग, हर घाट योग” की प्रेरणादायी थीम के साथ जुड़ है। यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के उस संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन परमार्थ निकेतन द्वारा भारत सरकार के आयुष मंत्रालय, राष्ट्रीय आयुष मिशन उत्तराखण्ड तथा इंडियन योगा एसोसिएशन के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रमुख योग संस्थानों, सरकारी विभागों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मिलकर समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के प्रतिनिधिगण, राष्ट्रीय आयुष मिशन उत्तराखण्ड के अधिकारी, पौड़ी के जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी, टिहरी गढ़वाल के अतिरिक्त जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी सहित अनेक गणमान्य अतिथि, योगाचार्य एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रहीे।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि योग, केवल अभ्यास नहीं, यह भारत की आत्मा का जागृत स्वर है। यह वह दिव्य विज्ञान है जो मनुष्य को शरीर से ऊपर उठाकर चेतना की ऊँचाइयों तक ले जाता है। माँ गंगा की तरह योग भी हमें निरंतर प्रवाह के साथ जीने का संदेश देता है।
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 7 दिवसीय काउंटडाउन “गंगोत्री से गंगासागर” के इस पावन क्षण में हम यह संकल्प लें कि योग केवल आसनों तक नहीं रहे, बल्कि जीवन की दिशा बने। जब शरीर योग में स्थिर होता है तो स्वास्थ्य जन्म लेता है, जब मन योग में स्थिर होता है तो शांति प्रकट होती है, और जब आत्मा योग में लीन होती है तो दिव्यता का अनुभव होता है।
योग, भारत की वह अमूल्य देन है जो सीमाओं में नहीं बंधती, यह विश्व को जोड़ने वाली चेतना है। यही समय है, योग को जियो, योगी बनो, उपयोगी बनो, सहयोगी बनो, उद्योगी बनो और योग से विश्व को जोड़ो।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ’स्वस्थ आयु के लिए योग’ जो केवल लंबी उम्र नहीं है, बल्कि हर उम्र को ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य के साथ जीना है। हमारे ऋषियों ने कहा था- जीवन को वर्षों से नहीं, वर्षों को जीवन से भरना सीखो यही इस वर्ष का संदेश है जिसे अत्मसात करना होगा।
डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने परमार्थ गंगा तट के दिव्य वातावरण में सभी प्रतिभागियांे को ध्यान कराया।
परमार्थ गंगा तट 500 से अधिक प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल में सहभाग किया। इस 45 मिनट के योग सत्र को मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की डॉ. इन्दु शर्मा एवं परमार्थ निकेतन की योगाचार्या गंगा नंदिनी द्वारा हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में संचालित किया गया। इसमें विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं योगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया, जिसका उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा समग्र कल्याण को बढ़ावा देना है।।
विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण, हिमालय की पावन वादियों और माँ गंगा के निर्मल तट पर योगाभ्यास ने सभी प्रतिभागियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव का सृजन किया।
“गंगोत्री से गंगासागर” काउंटडाउन अभियान अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है, जो माँ गंगा के उद्गम से लेकर उनके सागर संगम तक योग के संदेश को पहुँचाने का प्रतीक है। गंगोत्री और ऋषिकेश में सफल आयोजनों के पश्चात अगला काउंटडाउन कार्यक्रम हरिद्वार में आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र पाण्डेय जी, राष्ट्रीय आयुष मिशन की टीम के श्री कृष्णकांत जी, श्रीमती वंदना डंगवाल जी, राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुर्वेद विभाग के प्रतिनिधिगण, इंडियन योगा एसोसिएशन के सदस्य, योग शिक्षक, साधक एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, आचार्य दीपक शर्मा, योगाचार्या गायत्री गुप्ता, परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमार, आचार्य उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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